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हरियाणा की 62 फीसदी महिलाओं में है खून की कमी (एनीमिया)

हरियाणा की 62 फीसदी महिलाओं में है खून की कमी (एनीमिया)

  • महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) के मामले में भारत विश्व में 170वें नंबर पर है और एनएफएचएस 4 के मुताबिक हरियाणा की 62 फीसदी महिलाओं में खून की कमी है.
  • महिलाओं में एनीमिया की प्रमुख वजह आयरन, विटामिन B12, विटामिन C और अन्य पोषक तत्वों की कमी है.
  • महिलाओं के लिए चिकित्सकों की सलाह है कि वे अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें, संतुलित आहार लें और आंतरिक रक्तस्राव को लेकर सजग रहें.

पंचकूला,29अक्टूबर: महिलाओं में खून की कमी यानी एनीमिया (रक्ताल्पता) की बीमारी के मामले में भारत का दुनिया में 170वां स्थान है. आयरन (लौह तत्व) की कमी से होने वाली इस बीमारी को लेकर भारत में स्वास्थ्य विभाग और अन्य हितधारकों के बीच बड़ी चिंता फैली हुई है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया भर में करीब 46.8 करोड़ गैर-गर्भवती महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं. हाल ही जारी नेशनल फैमिली एंड हेल्थकेयर सर्वे (2015-16) में बताया गया कि हरियाणा में 62 फीसदी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी एनीमिया की परिभाषा में बताया गया है कि जब हीमोग्लोबिन का स्तर 11 ग्राम से कम हो जाए. दुनिया भर में एनीमिया 41 फीसदी है जबकि विकासशील मुल्कों में यह 75 फीसदी है.

तो आखिर क्या कारण है कि एनीमिया इतनी भारी तादाद में महिलाओं को प्रभावित करता है? पंचकूला स्थित पारस ब्लिस हॉस्पिटल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका अग्रवाल बताती हैं, “महिलाओं को एनीमिया का आसान शिकार होने के तमाम कारण हैं. यह बीमारी प्रमुख रूप से शरीर में आयरन की कमी से होती है. आयरन की कमी से उचित हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता, जिससे एनीमिया होता है. पीरियड्स के दौरान होने वाले रक्तस्राव से महिलाएं मासिक चक्र में नियमित रूप से रक्त की कमी से जूझती हैं. इसके बाद संतुलित और अच्छे आहार की कमी हो जाए तो यह एनीमिया का कारण बन जाती है. किशोरावस्था, दूध निकलना, रजोनिवृत्ति और गर्भावस्था के दौरान हार्मोनों में बदलाव होते हैं, जिससे आयरन और कैल्शियम की मांग बढ़ जाती है. बच्चे को जन्म देने पर भी खून निकलता है और यह भी एनीमिया का कारण बनने में मदद करता है.”

एनीमिया के अन्य कारणों में शरीर द्वारा आयरन को अवशोषित (लेने) करने में असमर्थता भी होती है. जिन लोगों की आतों की सर्जरी या बीमारी हुई होती है उनमें भी आयरन अवशोषित करने की क्षमता कम हो जाती है. पोषण भी एक प्रमुख कारण है जिसकी वजह से एनीमिया होता है. शरीर में फोलिक एसिड, विटामिन C, विटामिन A या B12 की कमी होने पर भी आयरन की कमी हो जाती है. शरीर में आयरन पहुंचाने के लिए विटामिन C मदद करता है. भारत में कम आहार या आयरन (20 मिलीग्राम प्रतिदिन से कम) और फोलिक एसिड सेवन (70 माइक्रोग्राम प्रतिदिन से कम) भी इस बीमारी के बढ़ने में मदद करते हैं.

भारतीय परिदृश्य में देखें तो माना जाता है कि महिलाएं तमाम सामाजिक-सांस्कृतिक कारणों के चलते परिवार के पोषण को प्राथमिकता पर रखती हैं और अपनी पोषण की जरूरतों को दूसरे पर. पूरे देश में महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी हो गया है.

एनीमिया से बचा जा सकता है और इसे रोकने के लिए अच्छा आहार बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. डॉ. मोनिका अग्रवाल आगे कहती हैं, “एनीमिया से बचने के लिए आयरन युक्त (जरूरी) संतुलित आहार महत्वपूर्ण है. हरी-पत्तेदार सब्जियां, सूखे मेवे, अंडे, बीन्स, कद्दू, समुद्री भोजन और रेड मीट आयरन के उच्च स्रोत हैं. यह बहुत जरूरी है कि व्यक्ति को विटामिन C की कमी न हो और इसलिए विटामिन C से युक्त भोजन लेना चाहिए. पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकोली, टमाटर, फूलगोभी और संतरा, अंगूर, खरबूजा व आम जैसे फलों में विटामिन C काफी अच्छी मात्रा में होता है.”

इस बीमारी के इलाज के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि मरीज में रक्तस्राव के किसी भी कारण का पता लगाकर उसका इलाज किया जाए. स्वास्थ्यवर्धक और पोषक आहार लेने के अलावा मरीजों को आयरन और विटामिन C सप्लीमेंट्स लेने के लिए भी कहा जाता है. गंभीर मामलों में सामान्यता ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिये इलाज किया जाता है.

एनीमिया के लक्षणों में थकान और एनर्जी में कमी, असामान्य तेज दिल की धड़कन, सांस में तकलीफ, एकाग्रता में कठिनाई, अनिद्रा शामिल हैं. आयरन की कमी के कारण मुंह का दर्द हो सकता है और किनारों पर दरारें आ सकती हैं. इसके अलावा पिका जैसी एक विशेष स्थिति आ सकती है जिमें कागज, बर्फ या गंदगी जैसे अजीब सी चीजें खाने की भूख लगना शामिल है. नाखूनों का ऊपर की ओर मुड़ना भी आयरन की कमी का लक्षण है. इसके अलावा जिन लोगों में विटामिन B12 की कमी होती है उन्हें हाथों-पैरों में अजीब सी कठोरता महसूस होती है. महिलाओं को चाहिए कि वे इन लक्षणों को लेकर सतर्क रहें और अपने स्वास्थ्य व आहार पर ध्यान दें. इन लक्षणों की समय रहते पहचान होने पर चिकित्सीय सहायता लेकर इस बीमारी की जांच और इलाज करवाया जा सकता है.

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